बिजली चोरी पकड़ने के लिए PSS, फीडर और ट्रांसफॉर्मर पर मीटर लगाए जाएंगे: क्या है हकीकत?

यह खबर सच है और भारत सरकार की चल रही योजनाओं का हिस्सा है। बिजली चोरी (इलेक्ट्रिसिटी थेफ्ट) और लाइन लॉस कम करने के लिए देशभर में फीडर, डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफॉर्मर (DT) और सब-स्टेशन (PSS यानी पावर सब-स्टेशन) स्तर पर स्मार्ट मीटर लगाने का काम तेजी से चल रहा है।

मुख्य योजना: रिवैंप्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (RDSS)

  • लॉन्च: 2021 में, मिनिस्ट्री ऑफ पावर द्वारा।
  • उद्देश्य: बिजली वितरण को मजबूत करना, AT&C लॉस (टेक्निकल और कमर्शियल लॉस) कम करना, चोरी रोकना और पारदर्शिता लाना।
  • स्मार्ट मीटरिंग का फोकस:
  • कंज्यूमर मीटर: प्रीपेड स्मार्ट मीटर (लगभग 25 करोड़ लक्ष्य)।
  • फीडर मीटर: सभी 11 kV और ऊपर के फीडर पर (लगभग 2.1 लाख स्वीकृत)।
  • DT मीटर (ट्रांसफॉर्मर पर): लगभग 52-54 लाख स्वीकृत।
  • सब-स्टेशन स्तर: फीडर और इनपुट मीटर से निगरानी।
  • प्रोग्रेस (दिसंबर 2025 तक):
  • कुल 4.76 करोड़ स्मार्ट मीटर इंस्टॉल (कंज्यूमर मुख्यतः)।
  • फीडर मीटर: 1.7 लाख से ज्यादा इंस्टॉल।
  • DT मीटर: 45 लाख से ज्यादा।
  • कई राज्यों में तेजी: उत्तर प्रदेश (25,000+ फीडर मीटर, 2.29 लाख DT मीटर), बिहार (2.30 लाख DT मीटर), गोपालगंज, अयोध्या आदि में विशेष अभियान।

कैसे पकड़ी जाती है चोरी?

  • फीडर मीटर: फीडर से कितनी बिजली गई, इसका रीयल-टाइम डेटा।
  • DT मीटर (ट्रांसफॉर्मर पर): ट्रांसफॉर्मर से निकली बिजली vs कंज्यूमर मीटर की रीडिंग। अंतर ज्यादा हो तो चोरी या लॉस का संकेत।
  • PSS/सब-स्टेशन: इनपुट-आउटपुट मीटर से बड़े स्तर पर मॉनिटरिंग।
  • रीयल-टाइम डेटा से इलाके की पहचान कर जांच अभियान चलाए जाते हैं। इससे लाइन लॉस 15-19% तक कम हुआ कई जगहों पर।

फायदे

  • बिजली चोरी पर अंकुश।
  • सटीक बिलिंग, ओवरलोडिंग कम।
  • ईमानदार उपभोक्ताओं को राहत (चोरी का बोझ नहीं)।
  • रिन्यूएबल एनर्जी इंटीग्रेशन आसान।

यह कोई नई “घोषणा” नहीं, बल्कि RDSS का चल रहा हिस्सा है। कई राज्य (UP, बिहार, राजस्थान आदि) में 2025 में तेजी से काम हो रहा है। अधिक जानकारी के लिए आधिकारिक साइट https://rdss.gov.in/ या https://www.nsgm.gov.in/ देखें। स्थानीय डिस्कॉम से संपर्क करें अगर आपके इलाके में मीटर लग रहे हैं।

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