लखनऊ, 26 दिसंबर 2025: भारत के गांवों को आत्मा का आधार कहा जाता है, लेकिन आजादी के 78 साल बाद भी करोड़ों ग्रामीणों के पास अपने पक्के घरों का कानूनी कागजात नहीं थे। इससे न केवल संपत्ति विवाद बढ़ते थे, बल्कि बैंक लोन भी मुश्किल से मिल पाता था। इसी लंबे इंतजार को समाप्त करते हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा ने मंगलवार को ‘उत्तर प्रदेश ग्रामीण आबादी अभिलेख विधेयक, 2025’ (घरौनी कानून) को ध्वनिमत से पारित कर दिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार का यह कदम ग्रामीण भारत को सशक्त बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
कानून मंत्री बाबू लाल आर्य ने विधेयक पेश करते हुए कहा कि यह केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री स्वामित्व (SWAMITVA) योजना का हिस्सा है, जिसे प्रदेश में ‘घरौनी योजना’ के रूप में लागू किया गया है। ड्रोन सर्वेक्षण के माध्यम से अब तक 1.5 लाख से अधिक गांवों का नक्शांकन हो चुका है। इस कानून से ग्रामीण आबादी के अभिलेखों को कानूनी मान्यता मिलेगी, जिससे वरासत, बिक्री, नामांतरण और बंधक जैसी प्रक्रियाएं सरल हो जाएंगी। अब गांव की जमीन पर घर बनाने या मरम्मत के लिए बैंक आसानी से लोन दे सकेंगे, क्योंकि घरौनी प्रमाण-पत्र संपत्ति का वैध दस्तावेज माना जाएगा।
इससे पहले, ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति के अभाव में लोग आर्थिक रूप से कमजोर बने रहते थे। विवादों के कारण अदालतों में लाखों मामले लंबित हैं। घरौनी कानून इन सबको दूर करेगा। विधेयक के अनुसार, राजस्व विभाग द्वारा जारी घरौनी रिकॉर्ड को राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित किया जाएगा। इससे ग्रामीणों को संपत्ति कर निर्धारण, जीआईएस-आधारित भूमि रिकॉर्ड और विवाद निपटान में सहूलियत मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देगी, क्योंकि अब किसान और मजदूर अपनी संपत्ति को गिरवी रखकर उद्यम शुरू कर सकेंगे।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कैबिनेट बैठक में इसकी सराहना करते हुए कहा, “यह कानून न केवल ग्रामीणों को उनका हक दिलाएगा, बल्कि डिजिटल इंडिया के सपने को साकार करेगा।” विपक्ष ने भी विधेयक का समर्थन किया, हालांकि कुछ सदस्यों ने कार्यान्वयन में पारदर्शिता की मांग की। अब विधेयक राज्यपाल की मंजूरी के बाद कानून बनेगा, और 2026 से पूर्ण रूप से लागू होगा।
SWAMITVA योजना के तहत उत्तर प्रदेश पहले ही देश में अग्रणी है। पंचायती राज मंत्रालय के अनुसार, 2025 तक 6.62 लाख गांवों का सर्वे पूरा होगा। यूपी में इससे 2 करोड़ से अधिक परिवार लाभान्वित होंगे। यह कदम न केवल आर्थिक सशक्तिकरण लाएगा, बल्कि सामाजिक न्याय भी सुनिश्चित करेगा। ग्रामीण भारत अब नई उम्मीदों से चमकेगा, जहां हर घर की दीवारें मजबूत कागजातों से सुरक्षित होंगी।