न्यू टैक्स रिजीम में होम न्यू टैक्स रिजीम में होम लोन के ब्याज से टैक्स बचाना पड़ सकता है भारी, प्रॉपर्टी बेचने से पहले जान लें ये नियम

नई दिल्ली, 25 दिसंबर 2025 (विशेष संवाददाता): नई टैक्स व्यवस्था (सेक्शन 115BAC) को अपनाने वाले करदाताओं के लिए होम लोन पर ब्याज की टैक्स छूट न मिलना एक बड़ा फायदा लगता है, लेकिन प्रॉपर्टी बेचते समय यह भारी पड़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, नई व्यवस्था में सेक्शन 24(b) के तहत सेल्फ-ऑक्यूपाइड प्रॉपर्टी पर होम लोन ब्याज की ₹2 लाख तक की छूट नहीं मिलती। ऐसे में कई लोग प्रॉपर्टी बेचते समय इस ब्याज को ‘कॉस्ट ऑफ एक्विजिशन’ में जोड़कर कैपिटल गेन टैक्स कम करने की कोशिश करते हैं, लेकिन यह जोखिम भरा हो सकता है और इनकम टैक्स विभाग से नोटिस आ सकता है।

नई टैक्स रिजीम में होम लोन ब्याज की छूट क्यों नहीं?

वित्त वर्ष 2025-26 (AY 2026-27) से नई टैक्स रिजीम डिफॉल्ट हो गई है। इसमें कम स्लैब रेट्स का फायदा तो मिलता है, लेकिन कई डिडक्शन्स खत्म हो गए हैं:

  • सेल्फ-ऑक्यूपाइड प्रॉपर्टी पर होम लोन ब्याज की छूट (सेक्शन 24(b)) पूरी तरह बंद।
  • प्रिंसिपल रिपेमेंट पर सेक्शन 80C की छूट भी नहीं।
  • केवल लेट-आउट (किराए पर दी गई) प्रॉपर्टी पर ब्याज की पूरी छूट मिलती है (बजट 2025 में लिमिट ₹3 लाख तक बढ़ाई गई)।

ओल्ड रिजीम में ये छूट मिलती हैं, इसलिए होम लोन वाले ज्यादातर लोग ओल्ड रिजीम चुनते हैं। लेकिन नई रिजीम में छूट न मिलने से लोग सोचते हैं कि ब्याज को प्रॉपर्टी की लागत में जोड़कर कैपिटल गेन कम कर लें।

प्रॉपर्टी बेचने पर क्या होता है जोखिम?

प्रॉपर्टी बेचने पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स लगता है (12.5% बिना इंडेक्सेशन के, या 20% इंडेक्सेशन के साथ — ओल्ड रिजीम में)। कैपिटल गेन कम करने के लिए सेक्शन 48 के तहत ‘कॉस्ट ऑफ एक्विजिशन’ में कुछ खर्च जोड़े जा सकते हैं।

  • समस्या: बजट 2023 में संशोधन हुआ कि यदि आपने होम लोन ब्याज पर सेक्शन 24(b) की छूट क्लेम की है, तो उसे लागत में नहीं जोड़ सकते।
  • नई रिजीम में: छूट क्लेम नहीं की, इसलिए लोग सोचते हैं कि पूरा ब्याज (पोस्ट-एक्विजिशन) लागत में जोड़ सकते हैं।
  • एक्सपर्ट्स की राय: यह जोखिम भरा है। ब्याज का प्रॉपर्टी खरीद से ‘डायरेक्ट नेक्सस’ नहीं होता (केवल प्री-कंस्ट्रक्शन पीरियड का ब्याज जोड़ा जा सकता है)। दिल्ली ITAT के कुछ केस में अस्वीकार किया गया। विभाग नोटिस भेज सकता है या पेनाल्टी लगा सकता है।

सीए डॉ. सुरेश सुराणा कहते हैं, “नई रिजीम में भी पोस्ट-एक्विजिशन ब्याज को लागत में जोड़ना सुरक्षित नहीं। केवल प्री-कंस्ट्रक्शन ब्याज ही मान्य हो सकता है।”

कैपिटल गेन टैक्स बचाने के सही तरीके

प्रॉपर्टी बेचने पर टैक्स बचाने के लिए:

  • सेक्शन 54: LTCG को नए रेजिडेंशियल हाउस में री-इन्वेस्ट करें (खरीद: 1 साल पहले या 2 साल बाद; कंस्ट्रक्शन: 3 साल में)। होम लोन लेकर भी क्लेम कर सकते हैं।
  • सेक्शन 54F: अन्य एसेट बेचकर हाउस में निवेश (शर्तें लागू)।
  • सेक्शन 54EC: स्पेसिफाइड बॉन्ड्स में निवेश (लिमिट ₹50 लाख)।
  • ये एग्जेम्पशन्स दोनों रिजीम्स में उपलब्ध हैं।

सलाह: क्या करें?

  • यदि होम लोन बड़ा है और ब्याज ज्यादा, तो ओल्ड रिजीम चुनें — छूट मिलेगी और कैपिटल गेन पर इंडेक्सेशन का फायदा।
  • नई रिजीम में रहें तो ब्याज को लागत में जोड़ने से बचें — टैक्स कैलकुलेटर से दोनों रिजीम्स कंपेयर करें।
  • प्रॉपर्टी बेचने से पहले CA से सलाह लें, ITR फाइलिंग में सही क्लेम करें।

यह नियम घर खरीदारों और निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण हैं, खासकर बढ़ती प्रॉपर्टी कीमतों के दौर में। गलत क्लेम से नोटिस और पेनाल्टी का खतरा रहता है। अधिक जानकारी के लिए इनकम टैक्स पोर्टल incometax.gov.in चेक करें या विशेषज्ञ से संपर्क करें।

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